Shram Vibhajan aur Jati Pratha – हिंदी कक्षा 10 श्रम विभाजन और जाति-प्रथा

इस पोस्‍ट में हम बिहार बोर्ड कक्षा 10 के हिन्‍दी विषय के पाठ 1 (Shram Vibhajan aur Jati Pratha) — श्रम-विभाजन और जाति प्रथा को पढ़ेंगे, जिसके लेखक डॉ. भीमराव अंबेडकर हैं। यह पाठ सीबीएसई बोर्ड की कक्षा 12 की हिन्‍दी पुस्तक में भी शामिल है।

Shram Vibhajan aur Jati Pratha✍️ लेखक परिचय

डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 ई० में मध्य प्रदेश के महू नामक स्थान पर हुआ था।
उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए पहले अमेरिका (न्यूयॉर्क) और फिर लंदन का रुख किया।
कुछ समय वकालत करने के बाद वे राजनीति और समाज सुधार के क्षेत्र में सक्रिय हुए।
उन्होंने अछूतों, महिलाओं और मजदूरों को समान अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया।

निधन – 6 दिसम्बर 1956 ई०
मुख्य रचनाएँ – The Castes in India, Their Mechanism, Genesis and Development, Who are Shudras, Buddha and His Dhamma, Annihilation of Caste, The Untouchables – Who Are They आदि।

📚 पाठ परिचय

प्रस्तुत पाठ ‘श्रम विभाजन और जाति-प्रथा’ डॉ. अंबेडकर के प्रसिद्ध भाषण ‘Annihilation of Caste’ का एक अंश है।
इस निबंध में लेखक ने समाज में फैले जातिगत भेदभाव और असमानता की कड़ी आलोचना की है।
साथ ही, उन्होंने लोगों में मानवता, समानता, और भाईचारा (भातृत्व) जैसे गुणों के विकास का संदेश दिया है।

📖 पाठ का सारांश

इस पाठ में लेखक बताते हैं कि कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि श्रम-विभाजन कार्यकुशलता के लिए आवश्यक है, और जाति-प्रथा उसी का रूप है।
परंतु लेखक का कहना है कि जातिवाद वास्तव में श्रम का नहीं, बल्कि श्रमिकों का विभाजन करता है, जो अस्वाभाविक है।

भारत की जाति-प्रथा व्यक्ति को उसकी रुचि और क्षमता के अनुसार कार्य चुनने की स्वतंत्रता नहीं देती।
इसके विपरीत, व्यक्ति को उसके माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार ही पेशा अपनाने के लिए बाध्य किया जाता है।

यह व्यवस्था व्यक्ति को एक ही पेशे में जीवनभर बाँध देती है, जिससे परिवर्तन के समय वह रोज़गार खो देता है और निष्क्रिय हो जाता है।
लेखक के अनुसार, ऐसा समाज जिसमें लोग अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार कार्य चुन सकें, वही सक्षम और स्वतंत्र समाज कहलाता है।

अंत में, डॉ. अंबेडकर यह निष्कर्ष निकालते हैं कि आदर्श समाज वही है, जहाँ स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है।

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